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समाज सेवा में अगणी
कस्तूरी लाल सिंगला
पीरों फकीरों सन्तों महात्माओं ऋषिओं, मुनिओं, की मंगलमयो
प्रभात में पिता श्री काका राम जी के घर माता सुक्षी वदामी
देवी की गोद में महान समाज सुधारक, सुनाम के अमर सपूत
कर्मयोगी, तपोनिष्ट, प्रतिभाषाली, पटियाला स्टेट के गौरव,
पंजाब की शांन भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी श्री कस्तूरी
लाल सिंगला जी ने जन्म लिया। सरकारी हार्इ स्कूल से विधा
प्राप्ती का आरम्भ कर लाहौर से मैटि्रक की परीक्षा उर्तार्ण
की एवंम सुनाम में अपना करोबार आरम्भ किया। इस समय आपकी
नियुक्ती पटियाला स्टेट के सचिव (ैमबतमजंतल) के पद पर हो
गर्इ। आप पटियाला स्टेट की ओर से टैक्स्टार्इल ब्रांच में
अवैतनिक रूप से लेजन आफिसर बनकर बम्वर्इ गए। सिंगला साहिब के
लिए गौरव की बात थी कि आप वर्षों तक पटियाला स्टेट ज्युरी के
सदस्य रहे। भारत के इस महान सपूत ने भारत के स्वतंत्रता
आन्दोलन में भाग लिया और जेल यात्रा की। अंग्रेज सरकार के
अनेक अत्याचार सहे। आपको झुठे मुकदमें बनाकर अनेक कष्ट दिये
गये। भारत स्वतंत्र हो गया। स्वतंत्रता के प्रकाश में आप
समाज सेवा के काम में निरन्तर स्क्रिय रहे। शरर्णाधियों की
आप द्वारा की गर्इ सेवा बेमिसाल रही। 1958 में नगर पालिका
सुनाम के चुनावों में आप नगर पिता चुंने गये। 1964 में सुनाम
नगर पालिका के प्रधान बने। नगर पालिका के लिए आपका चुनाव
निर्विरोध होना आपकी लोकप्रियता को परिचायक है। नगर पालिका
के प्रधान के रूप् में आप द्वारा किए गए विकास कार्यों को
लोग आज भी याद करते हैं। शहर से मण्डी को जोड़ने के लिए गीता
भवन सड़क का निर्माण पूराने अस्पताल से शहीद ऊधम सिंह छोटी
धर्मशाला तक सड़क वनवाना, बाबा भार्इमूल चन्द जी की समाध तक
सड़क का निर्माण करवाना, सीवरेज का आरम्भ शुरू करवाना तथा
वाटर सप्लार्इ शुरू करवाना, जखेपल रोड़ स्कूल के नजदीक पंजोप
को साफ करवा कर पार्क बनवाना, लड़कियों के सरकारी सीनियर
स्कैणडरी स्कूल का निर्माण करवाने तथा उन दिनों जे.वी.टी. की
कक्षाऐं शुरू करवाने, शिक्षा के क्षेत्र को उंचा उठाने हिन्दू
सभा स्कूल की स्थापना करवाने, हिन्दू सभा कालज फार वुमैन को
तरक्की की मंजिलों तक पहुंचाने में वहुमुलय योगदान दिया। श्री
सिंगला जी जीवन प्रयन्त सुनाम की अनेक धार्मिक, सामाजिक,
शैतिक संस्थाओं के सदस्य रहे। नगर पालिका के प्रधान के रूप्
में किए गये कामों की निशानियां आज तक मौजूद हैं। सुनाम के
लोगों को अपने इस सपूत पर मान रहा। 85 वर्ष की आयू में 12
अगस्त 2008 को अपनी जविन यागा पूर्ण कर प्रभू चरणों में
विलींन हो गये। उनके बेटे और बेटियों भारत और विदेशों में
समाज की सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों को सींच कर उनकी खुषबु
बांट रहे हैं। |
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